हर साल होने वाला Zoomtopia इवेंट अब सिर्फ एक टेक कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि “काम का भविष्य” समझने का पैमाना बन चुका है। इस साल का वर्चुअल इवेंट 17 सितंबर को हुआ और इसका थीम था “Zoom for the People” यानी टेक्नोलॉजी को लोगों के और करीब लाना। इस बार फोकस रहा – AI, कनेक्टिविटी और काम का बदलता अंदाज़।
लेकिन बड़ा सवाल यही था – क्या Zoom इतना तेज़ इनोवेट कर पाएगा कि वो ऑफिस-वापसी के दौर और AI रेस में अपनी जगह बना सके?
आइए जानते हैं इस बार Zoomtopia से निकले 5 सबसे बड़े सवाल और उनके जवाब।
1. क्या Zoom ऑफिस वापसी के ट्रेंड को मात दे पाएगा?
Zoomtopia का सबसे बड़ा मुद्दा यही था कि अमेरिका में कंपनियां दोबारा ऑफिस बुलाने लगी हैं। कई फाइनेंशियल कंपनियां हफ्ते में 3 दिन ऑफिस आने का दबाव डाल रही हैं, और टेक कंपनियां भी धीरे-धीरे रिमोट वर्क के ऑप्शन कम कर रही हैं।
ये ट्रेंड Zoom की ग्रोथ के लिए खतरा है, क्योंकि 2020-22 के बीच Zoom की तेजी सिर्फ वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर की वजह से थी।
Zoom का जवाब है – मीटिंग्स को सिर्फ ऑफिस का विकल्प नहीं बल्कि उससे भी ज्यादा पावरफुल बनाना। CEO एरिक युआन ने साफ कहा कि Zoom अब सिर्फ कम्युनिकेशन टूल नहीं बल्कि एक AI वर्क प्लेटफॉर्म है।
नई AI Companion फीचर्स और डिजिटल ट्विन बनाने की बातें बताती हैं कि Zoom चाहता है कि वर्चुअल मीटिंग्स को इतना प्रोडक्टिव बनाया जाए कि ऑफिस कॉन्फ्रेंस रूम भी पीछे छूट जाए।
लेकिन सवाल वही है – क्या ये इनोवेशन ऑफिस कल्चर की ताकत को पूरी तरह हरा पाएंगे?
2. क्या Zoom AI रेस में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है?
Zoomtopia 2025 का सबसे हॉट टॉपिक रहा – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।
युआन ने खुद का एक AI अवतार दिखाया, जो उनकी जगह रिपेटिटिव काम कर सकता है। इसके साथ ही पेश किया गया AI Companion 3.0, जिसमें नोट्स बनाना, मीटिंग समरी, टास्क ऑटोमेशन और आगे चलकर डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
Zoom का सपना है – एक पर्सनल AI मैनेजर जो आपकी पसंद, कॉन्टैक्ट्स और वर्कफ्लो जानता हो और आपके लिए शेड्यूलिंग से लेकर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट तक संभाले।
लेकिन मुश्किल ये है कि माइक्रोसॉफ्ट Teams में Copilot जोड़ चुका है, गूगल Workspace में AI गहराई तक घुस चुका है, और Cisco भी Webex को AI से लैस कर रहा है।
यानी Zoom का AI bold तो है, लेकिन क्या ये बाकी से अलग दिख पाएगा, ये अभी साफ नहीं है।
3. Zoom की ओवरऑल स्ट्रैटेजी क्या है?
Zoomtopia में कंपनी ने अपनी स्ट्रैटेजी को तीन पिलर्स में समझाया:
- It just works – Zoom आसान, भरोसेमंद और सिक्योर है। यही इसकी सबसे बड़ी USP है।
- Make every second count – AI Companion अब मीटिंग समरी, एक्शन आइटम्स और टूल इंटिग्रेशन से वर्कर्स का टाइम बचाएगा।
- What matters to you – Zoom अपने प्लेटफॉर्म को हर तरह के कस्टमर के हिसाब से बना रहा है – चाहे वो फ्रीलांसर हों, छोटे बिज़नेस हों या बड़े एंटरप्राइज।
इसके अलावा CMO किम्बर्ली स्टॉरिन ने “Zoom Solopreneur 50” लॉन्च किया, जो उन इंडिविजुअल्स और माइक्रो-बिज़नेस को हाइलाइट करेगा जो Zoom पर अपनी ड्रीम कंपनियां बना रहे हैं।
4. पार्टनरशिप Zoom के लिए इतनी ज़रूरी क्यों हैं?
AI की तरह पार्टनरशिप भी Zoom की स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है।
इस बार इवेंट में दो बड़ी पार्टनरशिप अनाउंस हुईं – Cisco और Google के साथ।
- Cisco डील से अब Zoom Cisco Room डिवाइस पर ऑफिशियली चलेगा। यानी बड़ी कंपनियों के लिए एक और आसान ऑप्शन।
- Google Beam पार्टनरशिप से Zoom मीटिंग्स और भी रियल लगेंगी, जैसे सामने बैठा इंसान वाकई आपके कमरे में है।
Zoom जानता है कि वो माइक्रोसॉफ्ट या गूगल की तरह क्लाउड और हार्डवेयर नहीं बना सकता। इसलिए वो पार्टनरशिप्स के जरिए इकोसिस्टम में फिट होना चाहता है।
5. क्या Zoom इतनी प्रतियोगिता में टिक पाएगा?
Zoomtopia 2025 ने एक पॉज़िटिव तस्वीर पेश की – AI फीचर्स, डिजिटल ट्विन का विज़न, एजुकेशन इनिशिएटिव्स और बड़ी पार्टनरशिप्स।
लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
- अमेरिका में ऑफिस-वापसी का ट्रेंड बढ़ रहा है।
- माइक्रोसॉफ्ट Teams, गूगल Workspace और Cisco पहले से ही मज़बूत पोज़िशन पर हैं।
- अगर Zoom के इनोवेशन बाकी कंपनियों जैसे ही लगने लगे, तो ये प्लेटफॉर्म की जगह सिर्फ एक फीचर बनकर रह सकता है।
नतीजा ये है कि Zoom इनोवेट तो कर रहा है, लेकिन क्या ये बाकी दिग्गजों से अलग पहचान बना पाएगा? ये सवाल अभी खुला है।
कुल मिलाकर, Zoom अभी भी लड़ाई में है। AI और पार्टनरशिप इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन ऑफिस कल्चर और बड़ी कंपनियों की इकोसिस्टम पावर इसे चैलेंज करती रहेंगी।

